Digital India –भारत सरकार द्वारा चलाये जाने वाला एक बेहतरीन कार्यक्रम है| जिस का  एक मात्र उदेश हमारे समाज और ज्ञान अर्थव्यवस्था को पूर्ण रूप से डिजिटल बनाने का है| इसका उदेश भारत के छोटे बड़े सभी सरकारी विभागों को डिजिटल रूप देकर  इसकी गति को और आगे बढ़ाने का है|आप को पता होगा  की डिजिटल इंडिया कार्यक्रम 1 जुलाई 2015 को नरेन्द्र मोदी, अनिल अम्बानी अजीम प्रेजजी जैसे बड़े  लोगों की उपस्थिति में किया गया था ताकि नए विचारो द्वारा भारत को एक नई शक्ति दे कर और आगे बढ़ाया जा सके| India को डिजिटल बनाने के लिए हमें डिजिटल वॉलेट के बारे में जनना होगा|तो अये जानते है डिजिटल वॉलेट होता क्या है|

जैसा के हम जानते है के हमारा देश डिजिटल हो गया है तो ऐसे में कई बार आपका सामना डिजिटल वॉलेट जैसे शब्द  से हुआ होगा और शायद अपने इसका इस्तेमाल भी क्या होगा| तकनीक और व्यापार के क्षेत्र में डिजिटल वॉलेट किसी क्रांति से कम नही है| इसकी मदद से  आप बस एक क्लिक में शोपिंग से ले कर पेमेंट तक सब कुछ कर  सकते है| लेकिन जो लोग डिजिटल वॉलेट बारे में अबतक अनजान है तो वो आज जानेगे  के ये डिजिटल वॉलेट होता क्या है|और ये कैसे कम करता है|

 डिजिटल वॉलेट क्या है? 

 डिजिटल-वॉलेट एक प्रकार का इलेक्ट्रॉनिक कार्ड है जिसका उपयोग किसी कंप्यूटर या स्मार्टफ़ोन के माध्यम से ऑनलाइन किए गए लेनदेन के लिए किया जाता है। इसकी उपयोगिता क्रेडिट या डेबिट कार्ड के समान है। भुगतान करने के लिए व्यक्ति के बैंक खाते से एक ई-वॉलेट को जोड़ा जाता है। 

डिजिटल-वॉलेट प्री-पेड अकाउंट का एक प्रकार है जिसमें कोई उपयोगकर्ता भविष्य में ऑनलाइन लेनदेन के लिए अपना
पैसा स्टोर कर सकता है। एक ई-वॉलेट को हम पासवर्ड से सुरक्षित रख सकते है। ई-वॉलेट की मदद से, कोई किराने का सामान ऑनलाइन खरीद सकता है या फिर कोई अपना एयर  टिकट का भुगतान भी कर सकता है। 

 

डिजिटल-वॉलेट में मुख्य रूप से दो कॉम्पोनेन्ट होते है ,पहला सॉफ्टवेयर और दूसरा इनफार्मेशन | सॉफ्टवेयर कॉम्पोनेन्ट पर्सनल जानकारी स्टोर करता है और डेटा को सुरक्षा और एन्क्रिप्शन प्रदान करता है। इनफार्मेशन कॉम्पोनेन्ट उपयोगकर्ता द्वारा प्रदान किए गए डिटेल्स  का डेटाबेस है जिसमें उनका नाम, शिपिंग एड्रेस भुगतान विधि, भुगतान की जाने वाली राशि, क्रेडिट या डेबिट कार्ड की डिटेल्स शामिल  होती हैं।

 

 डिजिटल-वॉलेट खाते की इंस्टालेशन के लिए,उपयोगकर्ता को अपने डिवाइस पर सॉफ़्टवेयर इंस्टॉल करने
और आवश्यक इनफार्मेशन को डालते की ज़रुरत होती है|
ऑनलाइन शॉपिंग के बाद, डिजिटल-वॉलेट ऑटोमेटिकली भुगतान फ़ॉर्म पर उपयोगकर्ता की जानकारी को भर देता है| डिजिटल-वॉलेट को एक्टिवेट करने के लिए, उपयोगकर्ता को अपना पासवर्ड दर्ज करना होता है और एक बार भुगतान करने के बाद, उपभोक्ता को किसी भी अन्य वेबसाइट पर आर्डर फ़ॉर्म भरने की आवश्यकता नहीं होती है क्योंकि जानकारी डेटाबेस में स्टोर होती है और आटोमेटिक रूप से अपडेट हो जाती है।

डिजिटल वॉलेट कितने तरह के होते हैं ?

क्लोज्ड  वॉलेट: इस तरह के भुगतान साधन आमतौर पर बिज़नेस  एस्टाब्लिश्मेंट द्वारा उनके संबंधित एस्टाब्लिश्मेंट में उपयोग के लिए जारी किए जाते हैं। ये उपकरण नकदी निकासी या रिडेम्प्शन की अनुमति नहीं देते हैं।

 

सेमि क्लोज्ड: ये भुगतान साधन हैं जो स्पष्ट रूप से पहचाने गए व्यापारी स्थानों/प्रतिष्ठानों के समूह में रिडीम करने योग्य हैं जो विशेष रूप से जारीकर्ता के साथ भुगतान साधन स्वीकार करते हैं। ये इंस्ट्रूमेंट होल्डर को  नकदी निकासी या रिडेम्प्शन की अनुमति नहीं देते हैं।

 

सेमि ओपन: इस  भुगतान उपकरण का उपयोग किसी भी कार्ड को मर्चेंट स्थानों को एक्सेप्ट करने वाले सामानों और सेवाओं की खरीद के लिए किया जाता है (बिक्री टर्मिनल प्वाइंट)। ये उपकरण धारक द्वारा नकदी निकासी या रिडेम्प्शन की अनुमति नहीं देता  हैं।

 

ओपन सिस्टम: ये भुगतान साधन हैं जिनका यूज़ माल और सेवाओं की खरीद के लिए किया जाता है और ये एटीएम पर नकद निकासी की अनुमति भी देता है|